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इजराइल और ईरान की दुश्मनी कितनी गहरी?

ईरान और इज़रायल के झगड़े का मूल कारण क्या है? जानिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, फिलिस्तीन मुद्दा, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय राजनीति और ताजा तनाव के बारे में पूरी जानकारी।परिचय मध्य-पूर्व की राजनीति में सबसे चर्चित और संवेदनशील मुद्दों में से एक है ईरान और इज़रायल का संघर्ष। ईरान और इज़रायल के बीच दुश्मनी केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धार्मिक, वैचारिक, सैन्य और रणनीतिक कारण भी शामिल हैं।इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर इन दोनों देशों के झगड़े की जड़ क्या है और यह संघर्ष क्यों लगातार गहराता जा रहा है।

1.ईरान और इजरायल ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कब शुरू हुआ विवाद?

1948 में इज़रायल की स्थापना के बाद कई मुस्लिम देशों ने उसका विरोध किया। हालांकि शुरुआती वर्षों में ईरान और इज़रायल के संबंध पूरी तरह खराब नहीं थे।स्थिति 1979 में बदल गई, जब ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह राजा को हटाया गया अयातुल्ला खुमैनी सत्ता में आए। उन्होंने इज़रायल को “अवैध राज्य” घोषित कर दिया और अमेरिका शाह समर्थन करता था इस लिए ईरान के नेताओं को मुख्य विरोधी माना और फिलिस्तीन के समर्थन की खुली नीति अपनाई।यहीं से दोनों देशों के बीच वैचारिक टकराव की शुरुआत हुई।

2. ईरान और इसराइल युद्ध धार्मिक और वैचारिक मतभेद

ईरान एक इस्लामिक गणराज्य है, जो खुद को मुस्लिम दुनिया का नेता मानता है।इज़रायल एक यहूदी राष्ट्र है, जिसकी स्थापना यहूदियों के ऐतिहासिक अधिकार के आधार पर हुई।ईरान इज़रायल को मान्यता नहीं देता।ईरान के कई नेता इज़रायल के खिलाफ कड़े बयान देते रहे हैं।इज़रायल, ईरान को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानता है।यह धार्मिक और विचारधारात्मक टकराव इस संघर्ष का मूल आधार है।

3.ईरान और इसराइल फिलिस्तीन मुद्दा: संघर्ष का केंद्र

ईरान खुलकर फिलिस्तीन का समर्थन करता है और इज़रायल के खिलाफ सक्रिय संगठनों को समर्थन देता है। इनमें प्रमुख हैं:हमास ,हीजाबुल्लाह इन दोनों इजरायल पर का आरोप है कि ईरान इन संगठनों को हथियार, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता देता है, जिससे उसके खिलाफ हमले बढ़ते हैं।फिलिस्तीन-इज़रायल विवाद, ईरान-इज़रायल संघर्ष को और भड़काता है।

4. परमाणु कार्यक्रम: सबसे बड़ी चिंता

ईरान का परमाणु कार्यक्रम इज़रायल के लिए सबसे बड़ी चिंता है।इज़रायल को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह इज़रायल की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।2015 में ईरान ने विश्व शक्तियों और संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में एक परमाणु समझौता किया, जिसे JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) कहा जाता है।हालांकि इस समझौते के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और इज़रायल लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नजर रखे हुए है।

5. मध्य-पूर्व में क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई

ईरान और इज़रायल दोनों ही मध्य-पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं।ईरान, सीरिया और लेबनान में अपनी सैन्य और राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है।इज़रायल, सीरिया में ईरान समर्थित ठिकानों पर कई बार हवाई हमले कर चुका है।यह शक्ति संतुलन की लड़ाई भी दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण है।

6. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष संघर्ष

हालांकि दोनों देशों के बीच सीधा युद्ध नहीं हुआ, लेकिन कई बार:साइबर हमले गुप्त सैन्य ऑपरेशन ड्रोन और मिसाइल हमले प्रॉक्सी युद्ध इन घटनाओं ने संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया

7. अंतरराष्ट्रीय राजनीति की भूमिका

अंतरराष्ट्रीय शक्तियाँ भी इस संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।अमेरिका अक्सर इज़रायल का समर्थन करता है।रूस और चीन, कई मामलों में ईरान के साथ खड़े दिखाई देते हैं।इस कारण यह विवाद केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।

क्या भविष्य में युद्ध संभव है?

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण युद्ध की संभावना कम है, क्योंकि इससे पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता फैल सकती है।हालांकि, प्रॉक्सी युद्ध और सीमित सैन्य टकराव की घटनाएँ आगे भी जारी रह सकती हैं।

निष्कर्ष

ईरान और इज़रायल के झगड़े का मूल कारण केवल एक मुद्दा नहीं है। यह कई जटिल कारणों का मिश्रण है:

धार्मिक और वैचारिक मतभेद

फिलिस्तीन का समर्थन

परमाणु कार्यक्रम

क्षत्रीय शक्ति संतुलन

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिजब तक इन मुद्दों का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा, तब तक दोनों देशों के बीच तनाव बना रहेगा।

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